गुरुवार, 21 जून 2012


                                                               चर्तुथ ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन
                                                                             गांव लखनपुरा -दिनांक 15 जून 2011 


    साहित्य-संगीत-कला को समर्पित संस्था शब्दम् द्वारा दिनांक 15 जून 2011 को चर्तुथ ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। लोकप्रिय ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ हिन्दी कवि व पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह ने की।
    कार्यक्रम का प्रारम्भ परम्परागत तरीके से सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित कर किया। लखनऊ से आयी कवियत्री सुश्री व्याख्या मिश्र एवं काशगंज के श्री निर्मल सक्सेना ने सरस्वती वंदना की। सरस्वती वंदना के बाद शब्दम् संस्था के उपाध्यक्ष प्रो0 नंदलाल पाठक ने अपने संदेश में कहा कि आज आप ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन का आनन्द लेने आये हैं। इसके लिए आपको हार्दिक बधाई। ग्रामीण जीवन के चित्रण ने सूरदास को महाकवि का आसन प्रदान किया। एसे कार्यक्रम आयोजित कर शब्दम् अपने को धन्य मानता है।
वरिष्ठ हिन्दी कवि व पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह 
    शब्दम् संस्था की अध्यक्ष श्रीमती किरण बजाज ने अपने संदेश में कहा कि देश, समाज, पर्यावरण एवं हिन्दी शिक्षा का विकास करने वाले लोग धन्यवाद के पात्र है। मैं चाहूंगी कि ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन का सभी लाभ उठाए।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा0 ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने कहा कि कवियों का श्रोताओं से तुला तुल्य नाता है।
वरिष्ठ कवि श्री उदयप्रताप सिंह ने कहा कि गांधी जी कहते थे कि असली भारत गांव में रहता है। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से किसानों को जागृत किया। श्री उदयप्रताप सिंह ने अपनी कविता ‘‘वतन के कृषक और मजदूर, देश की माटी के सिन्दूर, उठो मेरे मीत उठो’’ से देश प्रेम की भावना को जागृत किया। उन्होंने कहा ‘‘गांव जितना प्रेम एवं सम्मान मिलता उतना कहीं नहीं-- शहर में मां-बाप आते है मुसीबत की तरह, गांव में आते हैं मेहमानों की तरह गांव में गये तो अपने पराये राजी प्यार देते है। होटल में ठहराते हैं शहरों में।
आजादी का सूरज चमका शहरों के आकाश में,
गांव पड़े है अभी गुलामी के इतिहास में।।
कासगंज के कवि निर्मल सक्सेना ने कहा कि गांव ने समाज को क्या नहीं दिया। कविता के माध्यम से कहते है।
     गांव मजदूर देता खेत खलियान देता । वास्ते जीने के सभी सामान देता।
शरहदों की सुरक्षा रात-दिन करते जो जागकर देश पर हो कुर्बान जहाँ में सबसे सुन्दर है मेरा गांव।
पर्यावरण सुरक्षा एवं ध्रुमपान का विरोध करते हुए कहा कि हमें खुशहाल रहना है तो गांव की ओर जाएगें।
पुराने अनुभवों से नया भारत बनायेंगे। रहे पर्यारण उत्तम नये हम वृक्ष लगायेंगे।
शहरों की दौड में शामिल गांव के लोगों, बहुत कीमती है जीवन व्यसनों में न खोय ये तम्बाकू मंदिरा फसल है मौत की कभी इन्हें जीवन में न बोना।
    श्री मुकेश मणिकान्चन ने समाज में जो परिवर्तन हो रहा है उसके बारे में कहा ‘‘प्यार का तो पुराना चलन हो गया। प्रीति की भावना का दमन हो गया। द्वेष की ग्रंथियां सभी के मन में भरी है, आज लोगों का क्या आचरण हो गया।
आगरा से आये डा0 केशव शर्मा ने अपनी कविता के माध्यम से कहा‘‘ अब हम किसे दोष दें और करे हम विलाप पीर। आंसुओं की गली में फरिस्ते मिले, टूटे-टूटे से बिखरे रिस्ते मिले टूटे रिस्तों की मेंहदी सजाते रहे लोग आते रहे जाते रहे।
आगरा से जाये श्री प्रताप दीक्षित ने ग्रामीण जीवन के बारे में कहा कि- ‘‘गांव शहरों की चला-चली से अच्छा लगता है। उगता सूरज सांझ ढ़ली से अच्छा लगता है’’
‘‘जिन्दगी कहां से कहां खींच लायी एक ओर कुंआ सब ओर खाई है’’
फिरोजाबाद से आये कवि चन्द्र प्रकाश यादव चन्द्र ने गुटखा, तम्बाकू का विरोध अपनी कविता के माध्यम से किया।
        गुटखा और तम्बाकू में आदी सब भये, कंचन की काया को ले डूबि भये।
कार्यक्रम में डा0 ओ0पी0 सिंह, डा0 ए0के0 आहूजा, डा0 उमाशंकर शर्मा, डा0 रजनी यादव एवं सिरसागंज से वरिष्ठ चिकित्सक डा0 धर्मेन्द्र नाथ, सहाय वन निरीक्षक, फिरोजाबाद श्री तेज प्रताप सिंह आदि गणमान्य व्यक्ति के अतिरिक्त लखनपुर आश्रम के स्वामी महाराम दास जी महाराज का विशेष योगदान रहा। गांव लखनपुरा के रामनरेश के अलावा सभी ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों का पूर्ण सहयोग रहा।
कार्यक्रम संयोजक श्री शशिकान्त पाण्डेय सहित शब्दम् और पर्यावरण मित्र के कार्यकर्ताओं ने समारोह की व्यवस्था को अंजाम दिया। आश्रम में पर्यावरण मित्र का स्टाल लगाकर लोगों को जागरूक किया गया

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