मंगलवार, 17 जुलाई 2012

शब्दम् हिंदी प्रश्नमंच प्रतियोगिता आयोजित


साहित्य, संगीत और कला को समर्पित संस्था शब्दम् द्वारा नए शिक्षण सत्र में दिनांक 11 जुलाई 2012 को मांड़ई स्थित संत जनू बाबा स्मारक महाविद्यालय में हिंदी प्रश्नमंच प्रतियोगिता का आगाज किया गया। जिसमें बीएड संकाय के 52 छात्र और छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रश्न का सही उत्तर देने वाले छात्र-छात्राओं को शब्दम् द्वारा सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम का प्रारम्भ शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य श्री मंजर उल वासै व कालेज के निदेशक श्री बृजेश बाबू गर्ग, सचिव श्री रामकैलाश यादव और प्राचार्य डा. जयदेव सिंह ने वाग्देवी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। तत्पश्चात् कालेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। इसके बाद शब्दम् के वरिष्ठ समन्वयक श्री अनुराग मिश्र ने संस्था और उसके उद्देश्यों के संबंध में छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य श्री मंजर उल वासै ने छात्रों से उनके स्तर के मुताबिक प्रश्न पूछे और उनका जो भी उत्तर है वह क्यों सही है यह भी विस्तार से समझाया। छात्रों में अभिषेक कुमार ने तीन, रंजन मिश्रा ने दो तथा शैलेष कुमार और विकास ने एक-एक प्रश्न का सही उत्तर दिया। इसी प्रकार छात्राओं में अमृता चतुर्वेदी, मधुभारती और रेनू बाला ने दो-दो तथा आकांक्षा, मांडवी चतुर्वेदी, संगीता और देव नंदनी ने एक-एक प्रश्न का सही उत्तर दिया। सही उत्तर देने वाले सभी विद्यार्थियों को शब्दम् की ओर से लेखनी प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में कालेज के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। अंत में प्राचार्य डा. जयदेव सिंह ने हिंदी प्रश्नमंच कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए हिंदी के उत्थान के लिए शब्दम् के प्रयासों की सराहना की।

"केसरिया बालम पधारो म्हारे देश"

दिनांक 24 अप्रैल 2012, मंगलवार

हिन्द परिसर स्थित संस्कृति भवन


साहित्य, संगीत और कला को समर्पित संस्था शब्दम और भारतीय लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने में कार्यरत संस्था स्पिक मैके के सहयोग से हिन्द परिसर स्थित संस्कृति भवन में राजस्थानी लोकनृत्य एवं गायन का आयोजन किया गया।

राजस्थान के जैसलमेर की मंगलियार जाति (जो राजपूत राजाओं के लिए गाने बजाने का कार्य करती थी) से सम्बन्ध रखने वाले खेटा खान व उनके साथियों ने राजस्थानी लोक संगीत को न केवल राजस्थान की सीमा के आगे अपितु देश के बाहर न्यूजीलैंड, यू.के., कनाडा तक पहुंचा दिया है। लोक गीतों को मात्र ग्रामगीत कहकर उनकी व्यापकता को कम नहीं किया जा सकता।

श्री खेटा खान ने अपनी कला व शास्त्रीय गायन के बीच के अन्तर को स्पष्ट करते हुये बताया कि शास्त्रीय गायन के लोग सुर व राग को गिन कर गाते हैं जबकि हम केवल गाने को दिमाग में रखते हैं और गाते व वाद्य यन्त्र बजाते हैं।

अपनी कला का प्रदर्शन खेटा खान ने गणेश वन्दना ‘‘महाराज गजानन आओ री मौरी सभा में रंग बरसाओ री.....................’’ के साथ किया।

राजपूतों में केसरिया रंग की महत्ता को बताते हुये ‘‘केसरिया बालम पधारो म्हारो देश.................’’ की धुन छेड़ी तो दर्शक ताली बजाने से अपने को रोक न सके।

खेटा खान ने जब कामयचा वाद्ययन्त्र की धुन को तबले की धुन के साथ मिलाया गया तो सुनने वाले झूम उठे और तालियों की लय से साथ मिलाने लगे।

एक के बाद एक लोक गीत ‘‘झूमा रे, झूमा रे, ढोलन मजारो मारो लूमा रे लूमा रे झूमा रे झूमा रे.................’’

निबुड़ा-निबुड़ा............................

दमादम मस्त कलन्दर ......................

आदि गानों को सुनकर लोग झूमते रहे।

वाद्ययंत्रों की थाप एवं उनसे निकलती धुन पर राजस्थान की प्रसिद्ध कालबेलिया लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया । नृत्यांगना ने अपनी आंखों के माध्यम से जमीन से अंगूठी उठाने की अदभुत कला का हैरतअंगेज नजारा पेश किया। जिसे देश दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।

सूफीयाना कलाम छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलायके..........ने सभी दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ दी। खेटाखान एवं उनके समूह के साथियों चनन खान, बरकत खान, कचरा खान, शेर खान, कुकला खान, शेर नाथ एवं लीला ने नृत्य एवं गायन की अदभुत एवं मंत्रमुग्ध करने वाली प्रस्तुति दी ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ सलाहकार मण्डल के सदस्यों एवं खेटा खान द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ।

कलाकारों का धन्यवाद देते हुये शब्दम् सलाहकार मण्डल की सदस्य एवं ज्ञानदीप सी.सेके. पब्लिक स्कूल की निदेशिका डा. रजनी यादव ने कहा कि धरती के उन महान सपूतों को जो अपनी कला और संस्कृति को आज भी कायम रखे हये है शब्दम् शतशत नमन करता है। उन्होंने स्पिक मैके की राज्य समन्वयक डा. राजश्री को धन्यवाद दिया कि जिनके माध्यम से शिकोहाबाद को ऐसे महान कलाकारों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। डा. रजनी ने शब्दम् अध्यक्षा श्रीमती बजाज को धन्यवाद देते हुये कहा कि उनके प्रयासों से हिन्दी संस्कृति और कला को बल मिला है।

कार्यक्रम में शब्दम् सलाहकार मण्डल के सदस्य श्री उमाशंकर शर्मा, श्री मंजर उल वासै, डा. ओ.पी. सिंह, डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया साथ ही शहर के गणमान्य डा. आर.के. सिंह, डा दीपाली अग्रवाल, डा. एस.के .एस. चौहान सहित हिन्द परिवार के लोग उपस्थित रहे ।

ज्ञानदीप स्कूल, ब्राइट स्कालर्स स्कूल, लार्ड कृष्णा स्कूल के कला संगीत में रुचि लेने वाले बच्चों ने भी कार्यक्रम का आनन्द उठाया। कार्यक्रम का संचालन श्री मुकेश मणिकान्चन ने किया।

बुधवार, 4 जुलाई 2012

‘जब दीप जले.. आना....’

8 मई 2012,   हिंद परिसर

शब्दम् और स्पिक मैके के संयुक्त तत्वावधान में हिंद परिसर स्थित संस्कृति भवन में सितार व तबला वादन कार्यक्रम ‘जब दीप जले.. आना....’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्व प्रसिद्ध सितार वादक प. रविशंकर के शिष्य पं. शुभेन्द्र राव ने सितार पर अपनी प्रस्तुति दी। श्री शैलेन्द्र मिश्र ने उनके साथ तबले पर संगत की। सितार और तबले से निकले मधुर राग ने उपस्थित श्रोताओं को इस प्रकार मंत्रमुग्ध कर दिया कि वो पूरी तरह से भारतीय शास्त्रीय संगीत के रस में डूब गए।
कार्यक्रम प्रस्तुत करते पं. शुभेन्द्र राव व श्री शैलेन्द्र मिश्र
 पं. शुभेन्द्र राव ने ‘पूरिया कल्याण’ राग के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद कई रागों को मिलाकर पं. राव व श्री मिश्र ने एक साथ सितार व तबले पर जुगलबंदी की। श्रोताओं ने भारतीय शास्त्रीय संगीत का भरपूर लुफ्त उठाया और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का खूब उत्साह वर्धन किया। अंत में बापू के पसंदीदा भजन ‘वैष्णव जन....’ की मधुर धुन ने तो मानों लोगों को मन ही मन भक्ति रस में झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद बच्चों ने भी संगीत का भरपूर आनंद लिया। इसके बाद शब्दम् सलाहकार मंडल द्वारा कलाकारों को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। डा. महेश आलोक ने कलाकारों का परिचय दिया। डा. रजनी यादव ने आगन्तुक कलाकारों व श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन श्री मुकेश मणिकांचन ने किया।

राग पूरिया-कल्याण : 
दो रागों पूरिया और कल्याण को मिलाकर पूरिया-कल्याण राग बना है। पूरिया-कल्याण राग वह राग है जिसे सूर्यास्त के बाद बजाया जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि एक ही समय में दो अलग-अलग रागों को साथ में बजाते हुए दोनों की लय बरकरार रखना। शास्त्रीय संगीत में एक विषेष तथ्य है कि कुछ राग ऐसे हैं जिनको बजाने का समय निर्धारित है।

कलाकारों का संक्षिप्त परिचय :
 पं. शुभेन्द्र राव का जन्म सन् 1964 में मैसूर में हुआ। उनके पिता श्री एन. आर. रामा राव प.रविशंकर के शिष्य रहे और उनकी माता जी भी सरस्वती वीणा वादन करती हैं। श्री राव ने संगीत की तालीम प. रविशंकर के संरक्षण में पाई। पं. राव ने 1984 में दिल्ली में अपना पहला कार्यक्रम और 1987 में बंगलुरू में अपने पहले सोलो कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। पं. राव भारत ही नहीं वरन् विश्व के कई देशों जैसे कन्सर्ट हाल ब्राडवे, कारनेगी हाल न्यूयार्क, वोमैड उत्सव गुर्नसे (यूके), नेशनल आर्ट्स उत्सव दक्षिण अफ्रीका, थियेटर डी ली विले पेरिस में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। पं. राव को 2007 में जी टीवी द्वारा यूथ आइकान फॉर क्लासिकल म्यूजिक के पारितोषिक से सम्मानित भी किया जा चुका है।
 तबले पर संगत कर रहे श्री शैलेन्द्र मिश्र बनारस और फर्रूखाबाद घरानों से ताल्लुक रखते हैं। इन्हें ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के ‘ए’ ग्रेड कलाकार का दर्जा प्राप्त है। श्री मिश्र भी भारत और अन्य देशों में अपने कई कार्यक्रमों की प्रस्तुति दे चुके हैं।

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

पांचवां ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन

 1 जुलाई 2012 जसराना


काव्य पाठ करते डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया


 साहित्य-संगीत-कला को समर्पित संस्था शब्दम् द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2012 को पांचवां ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन जसराना में महादेव मंदिर के निकट स्थित बगिया में आयोजित किया गया जहां सैकड़ों की संख्या में श्रोता उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ हिन्दी कवि श्री ओमप्रकाश उपाध्याय ‘मधुर’ ने की। सम्मेलन के दौरान पर्यावरण मित्र का स्टाल लगाकर लोगों को पर्यावरण और जैविक खेती के प्रति जागरूक भी किया गया।
     कार्यक्रम का शुभारंभ परम्परागत तरीके से मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्पन और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य व वरिष्ठ कवि डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने कवियों का परिचय कराया। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों को संस्था पर्यावरण मित्र की ओर से हरित कलश भेंट कर स्वागत किया गया। शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य श्री मंजर उल वासै ने शब्दम् संस्था का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. भदौरिया ने सबसे पहले एटा से आयी नवोदित कवयित्री कुमारी योगेश चैहान को आमंत्रित किया जिन्होंने ‘शब्द मेरे सजें अर्चना के लिए, साधिका मैं बनूं साधना के लिए’ सरस्वती वंदना की। उन्होंने कविता के माध्यम से भ्रूण हत्या और किसानों की समस्याओं को भी उजागर किया।
    शब्दम् अध्यक्षा श्रीमती किरण बजाज ने दूरभाष के माध्यम से अपने संदेश में कहा कि ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन के आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति लोगों के मन में प्रेम जगाना है। श्रीमती बजाज ने आह्नान किया कि अधिक से अधिक संख्या में लोग हिंदी के उत्थान के लिए काम करें। शब्दम् के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ कवि प्रो. नंदलाल पाठक ने लोगों को हिंदी से जुड़ने की सीख देते हुए अपनी गजल ‘नभ रहे नीला, धरा धानी रहे, सांस ले सकने में आसानी रहे’ के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
     मिलावली से आए कवि एवं गीतकार डा. राजेन्द्र यादव ने अपने गीत ‘सुख सपना दुख बुलबुला, पलभर का मेहमान है, आशा दीप बुझा मत देना मंजिल अब आसान है’ के माध्यम से लोगों को धैर्य रखने की सीख दी। वरिष्ठ कवि डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने वीर रस की कविताओं ‘चंद्रशेखर ने खेली होली खून से तो लाल-लाल खून ही गुलाल लगने लगा’ और ‘ ....तो आज हमें आजाद हिंदुस्तान नहीं मिलता’ के माध्यम से श्रोताओं में जोश का संचार किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश उपाध्याय ‘मधुर’ ‘डाकुओं का केंद्र आज बनी राजधानी है’ और ‘चारों चरे बिहारी साड़ कि अन्ना खेत बचइयो रे’ जैसी कविताओं और लोकगीतों के माध्यम से लोगों को वाह-वाह कहने पर मजबूर कर दिया।
    मैनपुरी से पधारे कवि श्री जयेंद्र ‘लल्ला’ ने व्यंग्य ‘बनवारी की भैंस ने जब पड़िया जनी तो कई दिन तक खुशियां मनी, जब बनवारी की पत्नी ने बिटिया जनी तो उसने माथा फोड़ लिया’ के माध्यम से भ्रूण हत्या और अन्य सामाजिक बुराइयों को उजागर किया। लखीमपुर खीरी से आए व्यंजना विधा के महारथी कवि श्री श्रीकांत सिंह ने व्यंग्य ‘मैंने बिजली से पूछा कहो कैसी हो दिखती नहीं हो आजकल, बिजली बोली मौज में हूं, दिखूं कैसे कन्नौज में हूं’ के माध्यम से लोगों को गुदगुदाते हुए सरकार पर कटाक्ष करते हुए खूब तालियां बटोरीं। जसराना के स्थानीय कवियों श्री खलील गुमनाम, श्री अशोक अनजाना और श्री दुर्ग विजय सिंह ने भी काव्य पाठ किया।  
   कार्यक्रम के आयोजन में स्थानीय नागरिकों श्री राजेंद्र सिंह प्रधानाचार्य, श्री बाबी यादव, हिमांशु आटोमोबाइल के श्री अरविंद गुप्ता, श्री विशेष यादव, श्री राकेश यादव, श्री के.के. यादव का विशेष रूप से योगदान रहा। कार्यक्रम में शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य डा. ओ.पी. सिंह, डा. ए.के. आहूजा, श्री उमाशंकर शर्मा, डा. एस.के.एस. चैहान, डा. आर. बी. सिंह पूर्व प्राचार्य नारायण कालेज समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।