मंगलवार, 3 जुलाई 2012

पांचवां ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन

 1 जुलाई 2012 जसराना


काव्य पाठ करते डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया


 साहित्य-संगीत-कला को समर्पित संस्था शब्दम् द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2012 को पांचवां ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन जसराना में महादेव मंदिर के निकट स्थित बगिया में आयोजित किया गया जहां सैकड़ों की संख्या में श्रोता उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ हिन्दी कवि श्री ओमप्रकाश उपाध्याय ‘मधुर’ ने की। सम्मेलन के दौरान पर्यावरण मित्र का स्टाल लगाकर लोगों को पर्यावरण और जैविक खेती के प्रति जागरूक भी किया गया।
     कार्यक्रम का शुभारंभ परम्परागत तरीके से मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्पन और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य व वरिष्ठ कवि डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने कवियों का परिचय कराया। तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों को संस्था पर्यावरण मित्र की ओर से हरित कलश भेंट कर स्वागत किया गया। शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य श्री मंजर उल वासै ने शब्दम् संस्था का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. भदौरिया ने सबसे पहले एटा से आयी नवोदित कवयित्री कुमारी योगेश चैहान को आमंत्रित किया जिन्होंने ‘शब्द मेरे सजें अर्चना के लिए, साधिका मैं बनूं साधना के लिए’ सरस्वती वंदना की। उन्होंने कविता के माध्यम से भ्रूण हत्या और किसानों की समस्याओं को भी उजागर किया।
    शब्दम् अध्यक्षा श्रीमती किरण बजाज ने दूरभाष के माध्यम से अपने संदेश में कहा कि ग्रामीण कृषक कवि सम्मेलन के आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति लोगों के मन में प्रेम जगाना है। श्रीमती बजाज ने आह्नान किया कि अधिक से अधिक संख्या में लोग हिंदी के उत्थान के लिए काम करें। शब्दम् के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ कवि प्रो. नंदलाल पाठक ने लोगों को हिंदी से जुड़ने की सीख देते हुए अपनी गजल ‘नभ रहे नीला, धरा धानी रहे, सांस ले सकने में आसानी रहे’ के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
     मिलावली से आए कवि एवं गीतकार डा. राजेन्द्र यादव ने अपने गीत ‘सुख सपना दुख बुलबुला, पलभर का मेहमान है, आशा दीप बुझा मत देना मंजिल अब आसान है’ के माध्यम से लोगों को धैर्य रखने की सीख दी। वरिष्ठ कवि डा. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने वीर रस की कविताओं ‘चंद्रशेखर ने खेली होली खून से तो लाल-लाल खून ही गुलाल लगने लगा’ और ‘ ....तो आज हमें आजाद हिंदुस्तान नहीं मिलता’ के माध्यम से श्रोताओं में जोश का संचार किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश उपाध्याय ‘मधुर’ ‘डाकुओं का केंद्र आज बनी राजधानी है’ और ‘चारों चरे बिहारी साड़ कि अन्ना खेत बचइयो रे’ जैसी कविताओं और लोकगीतों के माध्यम से लोगों को वाह-वाह कहने पर मजबूर कर दिया।
    मैनपुरी से पधारे कवि श्री जयेंद्र ‘लल्ला’ ने व्यंग्य ‘बनवारी की भैंस ने जब पड़िया जनी तो कई दिन तक खुशियां मनी, जब बनवारी की पत्नी ने बिटिया जनी तो उसने माथा फोड़ लिया’ के माध्यम से भ्रूण हत्या और अन्य सामाजिक बुराइयों को उजागर किया। लखीमपुर खीरी से आए व्यंजना विधा के महारथी कवि श्री श्रीकांत सिंह ने व्यंग्य ‘मैंने बिजली से पूछा कहो कैसी हो दिखती नहीं हो आजकल, बिजली बोली मौज में हूं, दिखूं कैसे कन्नौज में हूं’ के माध्यम से लोगों को गुदगुदाते हुए सरकार पर कटाक्ष करते हुए खूब तालियां बटोरीं। जसराना के स्थानीय कवियों श्री खलील गुमनाम, श्री अशोक अनजाना और श्री दुर्ग विजय सिंह ने भी काव्य पाठ किया।  
   कार्यक्रम के आयोजन में स्थानीय नागरिकों श्री राजेंद्र सिंह प्रधानाचार्य, श्री बाबी यादव, हिमांशु आटोमोबाइल के श्री अरविंद गुप्ता, श्री विशेष यादव, श्री राकेश यादव, श्री के.के. यादव का विशेष रूप से योगदान रहा। कार्यक्रम में शब्दम् सलाहकार समिति के सदस्य डा. ओ.पी. सिंह, डा. ए.के. आहूजा, श्री उमाशंकर शर्मा, डा. एस.के.एस. चैहान, डा. आर. बी. सिंह पूर्व प्राचार्य नारायण कालेज समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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